शी प्रेन्योर्स

महीलाएँ अंधेरे के लिए इंतज़ार करती है शौचालय में जाने के लिए

महीलाएँ अंधेरे के लिए इंतज़ार करती है शौचालय में जाने के लिए

अंधेरा होने की वेट करनी पढ़ती है. यह कहानी वीडियो वॉलंटियर्स के ज़रिया बतौवाँ उत्तर प्रदेश से आई है. क्या स्वच्छ भारत अभिज्ञान के ज़रिया और टाय्लेट नही बॅन रहे? एक 17 साल की लड़की ने खुद-खुशी की क्योंकि उनसे घरवालों ने घर के अंदर बातरूम नही बनवाया – ऐसा कहना है हिंदू न्यूसपेपर का.(…)

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ईशिता मालविया भारत की पहली सरफर है

ईशिता मालविया भारत की पहली सरफर है

ईशिता मालविया भारत की पहली सरफर है. उन्होने एक सर्फ क्लब शुरू किया है. ईशिता और उनके पार्ट्नर तुषार सरफिंग सीखते है. यह सर्फ क्लब कर्नाटका में है. ईशिता और महीलाओं को सरफिंग करते देखना चाहती है.  भारत मे करीब १०० सरफर्स है किंतु औरतें नही. भारत में सरफिंग का स्पोर्ट अभी नया है. ईशिता का मानना है की अन्या(…)

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क्या औरतो को ख़ास एमबीए की ज़रूरत है?

क्या औरतो को ख़ास एमबीए की ज़रूरत है?

अनुराधा दस माथुर एक जर्नलिस्ट से एंट्रेपरेणेउर बनी. वह वेदिका स्कॉलर्स प्रोग्राम की फाउनडिंग डीन है. यह महीलाओं के लिए ख़ास एमबीए स्कूल है, वेदिका स्कॉलर्स प्रोग्राम. यहाँ पे महीलाओं के लिए स्कूल मैं स्पेशल ट्रैनिंग दी जाती है. पढ़ाई के अलावा यहाँ पर अन्य सब्जेक्ट की ट्रैनिंग दीजाती है. अनुराधा का लक्ष्य है की(…)

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विशिष्ट रूपानकन बनाती डिज़ाइनर मौल्श्रि सोमानि

विशिष्ट रूपानकन बनाती डिज़ाइनर मौल्श्रि सोमानि

अड्वर्टाइज़िंग और वॉल्ट डिज़्नी में प्रॉडक्ट मॅनेज्मेंट के उनके अनुभव मौल्श्रि सोमानि के हित में आ गये जब उन्होने उद्ययमी बनने का निर्णय लिया| अपनी रचनात्मकता को अपने ढंग से व्यक्त करने की चाह के चलते 2010 में उनकी डिज़ाइन कंपनी ‘व्हाटीफ़’ का जन्म हुआ| भक्ति माथुर द्वारा लिखी गयी बच्चों की किताब  ’अम्मा टेल(…)

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बाहर दत्त: खुश महिला से खुश माँ बनती है

बाहर दत्त: खुश महिला से खुश माँ बनती है

“मैं एक फुल टाइम लेखक हूँ, और पार्ट टाइम माँ”, कहना है पत्रकार बाहर दत्त का, ‘मोम्स मीन बिज़्नेस’ नाम की हमारी ख़ास श्रंखला में| “भारत में हमें बिना काम करना बंद किए बस मातृत्व का आनंद लेने की ज़रूरत है”|| बाहर दत्त अमृता त्रिपाठी से बात करती हैं|  “जब मैं पार्क में जाती हूँ,(…)

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भारतीय महिलाओं का आंदोलन और प्रकाशन

भारतीय महिलाओं का आंदोलन और प्रकाशन

उर्वशी बुटालिया भारत की सबसे पहले नारीवादी (फेमिनिस्ट) प्रकाशकों में से एक है- इन्हे ४० साल से भी ज्यादा प्रकाशन का अनुभव है. 1984 में ऋतू मेनोन क साथ मिलकर ‘काली फॉर वीमेन’ की सह-संस्थापना की.

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सुकन्या दत्ता रॉ:  उसकी कहानी और प्रेरणा,  उद्यमियों के लिए संदेश

सुकन्या दत्ता रॉ: उसकी कहानी और प्रेरणा, उद्यमियों के लिए संदेश

इस सुकन्या दत्ता रॉय की कहानी है.  वह swarovksi के सीईओ है.  इस साक्षात्कार में वह महिलाओं के सशक्तिकरण के बारे में बात कर रहा है. एक विशेष बातचीत में वे कहती हैं महिलाओं को स्वतंत्र और मुक्त दिमाग होना चाहिए.  हम अपने सपनों का पालन करें और अपने करियर का निर्माण करना चाहिए

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डिजिटल मीडीया के द्वारा टॅलेंट को बढ़ावा दे रही हैं नित्या दवीड

डिजिटल मीडीया के द्वारा टॅलेंट को बढ़ावा दे रही हैं नित्या दवीड

मार्केटिंग और अड्वर्टाइज़िंग की अपनी समझ को इन्होने उद्ययमी और नियोजक बनने में इस्तेमाल किया| आज, नित्या डेविड ‘अपस्ट्रीम’ नामक एक टॅलेंट सर्च फर्म चलाती हैं, जिसके क्लाइंट्स तनिष्क़, ज़ीवमे, कारबोन मोबाइल, लेनोव और लॅंडमार्क ग्रूप जैसे बड़े नाम हैं| अपने जीवन काल में स्थापित किए गये नेटवर्क्स ने उन्हे स्टार्टॅप शुरूकरने का आत्मविश्वास दिया|(…)

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कैसे इन सफल महिला उद्ययमियों ने सामाजिक रूढ़ि को तोड़ अपनी जगह तय की

कैसे इन सफल महिला उद्ययमियों ने सामाजिक रूढ़ि को तोड़ अपनी जगह तय की

स्टार्टॅप के इस नये युग ने काम करने की जगह और तरीके की जैसे कायापलट सी कर दी है| ShethePeople की संपादक अमृता त्रिपाठी ने देश की चार उभरती महिला उद्ययमियों से जानने की कोशिश करी की ऐसी क्या वजह थी की उन्होने दफ़्तर छोड़ कर अपने सपनों का पीछा करने का निर्णय लिया| वे(…)

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