• महोबा की साहसी बीडी बनाने वाली महिलाएं

    ऐसा कहा जाता हैं कि औरतें को बस बातें बनाना आता हैं लेकिन महोबा में क़स्बा कुलापहाड़ जिले के भौड़ी गाँव की औरतों ने इस बात को ग़लत साबित कर दिया है। महोबा जिले में क़स्बा कुलापहाड़ के भौड़ी गाँव में औरते तेंदू के पत्ते तोडती हैं। यह पत्ते खासतौर से बीड़ी बनाने के लिए उपयोग किये जाते हैं। तेंदू के पत्तो से बीड़ी बनाकर गाँव की औरते इनको बेच देती हैं। इस काम में भोर में उठकर जाना पड़ता है और इन पत्तो को जमा करके कड़ी दोपहरी में एक भारी गट्ठर में बांध कर मिलो दूर का रास्ता तय करके अपने घर लाती हैं। सुबह 6 बजे से 11 बजे तक पत्ते तोड़ने का काम होता है, और इसके बाद वापस लौटकर ये मेहनती औरतें इन पत्तो को सूखा कर इनसे बीड़ी बना का उत्पादन करती हैं। एक दिन में तकरीबन 500 बीड़ियां बनाती हैं।

    दिन ढलते हुए काम निपटा रही हैं महिलाएं, और सुबह फिर वहीं शुरुआत, वहीँ सफ़र पर निकलना है, “10 से 12 कोस दूर दूर तक चल कर जाना है।”

    10 से 12 कोस का सफ़र करके पत्ते तोड़कर लाने में यह औरतें घायल भी हो जाती हैं और इनके हाथो-पैरो में घाव भी पड़ जाते है। खतरनाक जंगल में जान पर खेल कर यह औरते अपना जीवन यापन कर रही हैं, जंगल वैसे भी औरतों के लिए सुरक्षित नहीं होता उसके बावजूद यह औरते बिना डरे अपनी रोज़ी रोटी और परिवार के लिए आती है।

    इस तरह समाज के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन जाती हैं ये महिलाएं।

    ये काम करने वाली सेवनी नामक महिला ने हमें बताया कि एक दिन वे 400 से 500 बीड़ी बना लेते हैं, और बीड़ियां 80 रुपए में बिक जाती हैं। मालती, जो करीब13 सालों से बीड़ी बनाने का काम कर रही हैं, बताती हैं कि वे ये काम बरसात के मौसम में ही करती हैं, “इसके बाद कोई मजदूरी लग गयी तो उसपे चले जाते हैं।”

    चलिए महोबा जिले के भौड़ी गाँव, जहाँ महिलाएं जंगल से पत्ते तोड़कर बना रही हैं बीड़ी

    वहीँ रईसा बानो एक सच को दर्शाती हैं जब वे कहती हैं, “अब हमारे पास खेती तो है नहीं ना कोई और ज़मीन। इसी बीड़ी के काम से पेट पाल रहे हैं। हाथों पैरों में छाले पड़ गये है, और इनकी दवाई तक नही ला पा रहे हैं।” 50 रुपए में अपनी बनाई बीड़ी बेच देने वाली रईसा बानो ये काम 10 साल से कर रही हैं, और बाकी महिलाओ की तरह उन्होंने भी ये काम देख देख कर ही सीखा है।”

    दिन ढलते हुए काम निपटा रही हैं महिलाएं, और सुबह फिर वहीं शुरुआत, वहीँ सफ़र पर निकलना है, “10 से 12 कोस दूर दूर तक चल कर जाना है।”

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