• निरंतर की पूर्णिमा गुप्ता

    निरंतर की पूर्णिमा गुप्ता कहती है की गावों की महीलाओं को पढ़ा लिखा करना देश इस ख़ास ज़रूरत है. उनका कहना है की लिटरसी एक मात्रा पढ़ाई नही है बल्कि विकास की ओर एक और कदम है. ज़िंदगी के हर पहलू में शिक्षा का उपयोग होता है, चाहे वो काम में हो या जीने का मज़ा लेने में. गुप्ता जी का काम आसान नही है क्योंकि वह बताती है की गावों में अधिकतर लोग निरक्षर है और उनके कोशिश है की वायसक साक्षरता के ज़रीय इसको बदला जाए.

    औरतों को पढ़ना आसान नही है और ना ही उनके लिए टीचर मिलना. समस्या कुछ ऐसे भी है की कॅस्ट जैसे मुद्दे टीचिंग के काम के बीच बढ़ा डालते है. पूर्णिमा गुप्ता से बातचीत कर रही है पूर्वी गुप्ता शी द पीपल से

     

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