• ‘अम्मा तेल मी’ के द्वारा पुराणों को आसान बन रही हैं भक्ति माथुर

    भक्ति का बचपन से ही किताबों से एक रिश्ता सा बन गया था| जीवन के आने वाले सालों में उन्होंने अनेक क्षेत्रों में कदम रखा| फाइनेंस की पढाई, वैवाहिक जीवन और मातृत्व के अनुभव कई देशों में प्राप्त कर आखिर २०१० में उन्होंने किताबों से अपने रिश्ते की ओर वापसी की| रिया दास के साथ ख़ास बातचीत में होन्ग कोंग में रहने वाली भर्ती माथुर अपने करियर की यात्रा के कुछ अंश बत्ती हैं, और बताती हैं कि क्यों पौराणिक कथाएं बच्चों के लिए ज़रूरी हैं ||

    किताबों से प्रेम

    मैं दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय परिवार में पाली बड़ी थी| बचपन में मेरी माँ, दादी और नानी का मुझपर बहुत प्रभाव रहा| मेरी माँ को भी पढ़ने का बहुत शौक था| वे एक लाइब्रेरियन थी, जिसके कारण बचपन से ही मैं लाइब्रेरी में बहुत समय बिताती थी, और यही से किताबों के साथ मेरा प्रेम शुरू हुआ||

    बड़े होते हुए एनिड ब्लैटन, जॉर्ज आर आर मार्टिन, अगाथा क्रिस्टी और शर्लाक होल्म्स जैसे लेखकों को पढ़ मैं अपनी साधारण दोपहर को रोमांचक बनाती| पर भारतीय पुराणों मेरी मनपसंद रही| इनमें मेरे कुछ मनपसंद लेखकों में देवदत्त पटनायक, एकनाथ ईस्वरं, और अशोक बैंकर शामिल हैं||

    आत्म प्रकाशन कि चुनौतियाँ

    मेरी चुनौती था व्यवसाय को चालना सीखना| मुझे आत्म-प्रकाशन कठिन लगा| किताब लिखना एक बात था, पर किसी व्याख्याता को ढूंढना, किताब छपवाना, उसके लिए डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर ढूंढ पाना और फिर मार्केटिंग और पी आर करना एक अलग ही खेल था| काम मुश्किल रहा है, पर सीखने को बहुत कुछ मिला||

    मेरे भारतियों पुराणों कि और वापस जाने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह कहानियां बच्चों कि सांस्कारिक परवरिश करने में उपयुक्त साबित होते हैं|

    Bhakti Mathur Books

    Bhakti Mathur Books

    बच्चे सबसे बड़ी प्रेरणा का स्त्रोत हैं

    मेरी प्रेरणा का स्त्रोत हैं मेरे दो बच्चे, शिव, जो ८ वर्ष का है और वीर, जो ६ वर्ष का है| वे ही है जो मुझे चलते रहने का बल देते हैं| और मेरे नन्हे पाठक, जो मेरे कई रीडिंग सेशंस में मुझसे मिलते हैं| उसके अलावा मुझे ‘भगवत गीता’ और शक्ति गावैं की ‘क्रिएटिव विसुअलिजशन’ ने काफी प्रभावित किया||

    यदि हम अपनी लड़कियों को पढ़ाने के बावजूद उन्हें यह सीख दे कि उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य शादी करना और वंश आगे बढ़ाना है, तो हम एक गलत सन्देश भेज रहे हैं|

    सह-लेखकों के लिए सलाह

    लिखना एक कठिन कार्य है| और बच्चों के लिए लिखना और भी कठिन| पर किसी और काम की तरह, जितनी मेहनत आप करेंगे, उतनी ही उन्नति आपको प्राप्त होगी| अपने पास उपलब्ध सभी साधनों का प्रयोग करें| लिखने पर किताबें पढ़े, अन्य लेखक संघों से जुड़े और लेखक समाज से बेहतर जुड़ने का प्रयास करें||

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